छत्तीसगढ़राज्य

जकांछ में फूट-देवव्रत-प्रमोद शर्मा का नहीं हैं भाजपा को समर्थन

रायपुर
जनता कांग्रेस छग के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। वैसे सियासी गलियारे में अजीत जोगी के न रहने के बाद से ही यह चर्चा तो होने लगी थी कि मरवाही का उपचुनाव जोगी कांग्रेस का भविष्य तय करेगा। जैसे ही स्व.अजीत जोगी व विधायक रेणु जोगी के विधायक प्रतिनिधियों के साथ कुछ अन्य बड़े नेताओं ने मरवाही-पेंड्रा में पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा तभी लगने लगा था कि चुनाव आते तक पार्टी में खदबदाहट मच जायेगी और वही हुआ। इस बीच एकाएक भाजपा को समर्थन देने के पीछे पार्टी नेताओं की आपसी फूट खुलकर सामने आ गई है।  प्रमोद शर्मा व देवव्रत सिंह का समर्थन भाजपा को देने का कतई नहीं हैं,पार्टी ने एकतरफा फैसला ले लिया इस पर उन्होने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। देवव्रत ने तो यहां तक पूछ डाला  कि क्या स्व.अजीत जोगी के जीवन से बड़ा हो गया है मरवाही का उपचुनाव कि भाजपा को समर्थन देने की नौबत आ गई।

इस समर्थन से पार्टी की काफी किरकिरी हो रही है वहीं डीलिंग के आरोप भी लगने लगे हैं। गदरअसल इस सियासी दांवपेंच की शुरूआत तब हुई जब उपचुनाव के लिए अमित व ऋचा का नामांकन भी खारिज हो गया। जातिगत पुराने मामलों में जोगी परिवार मरवाही उपचुनाव के मैदान से पूरी तरह बाहर हो गया। जोगी की आत्मकथा लेकर रेणु जोगी गांव-गांव घूम कर सहानुभूति का माहौल बना रही थी कि इस पर जिला प्रशासन ने रोक लगा दिया। कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है,वहीं भाजपा इस उम्मीद में रहा कि जोगी के वोटर्स उनके लिए वोट करेंगे,अब  तो उनका खुलकर समर्थन मिल गया है और अमित जोगी समेत तमाम लोगों ने भाजपा प्रत्याशी के लिए वोट करने समर्थन जता दिया है।

गौर करें तो जब उपचुनाव के लिए जोगी पार्टी के प्रत्याशियों का नामांकन खारिज हुआ और विधायक समेत पूरी पार्टी ने चुप्पी साध ली तभी लग गया था कि जोगी कांग्रेस में कुछ गड़बड़ है। उधर गौरेला पेंड्रा मरवाही को जिला घोषित करने के साथ जिस प्रकार राज्य सरकार ने विकास कार्यों की झड़ी लगाते हुए मोर्चा संभाला तब स्पष्ट हो गया था कि सदन में 70 की संख्या पूरी करने वे कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे। मुख्यमंत्री से लेकर समूचा संगठन जीत को अंतिम लक्ष्य मानकर मेहनत कर रहे हैं. वहीं भाजपा मैदान में तो है लेकिन मरवाही कभी उनका रहा नहीं इसलिए उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं हैं,लेकिन अब जोगी की पार्टी का समर्थन मिल जाने से वे भी ताल ठोंकने लगे हैं। जोगी के वोटर्स जरूर निर्णायक भूमिका में रहेंगे।

वहीं अचानक जकांछ के भाजपा को समर्थन देने से खुद जोगी के समर्थक नाखुश हैं,विधायक देवव्रत सिंह व प्रमोद शर्मा इससे सहमत नहीं हैं। हालांकि पार्टी ने समर्थन में प्रमोद का भी नाम शामिल किया है। धर्मजीत व डा.रमन के बीच हुई बातचीत के बाद यह सब तय हो गया। हालांकि कुछ दिन पहले मरवाही के कांग्रेस चुनाव प्रभारी जयसिंह अग्रवाल का बयान आया था कि जोगी कांग्रेस के तीन विधायक संपर्क में हैं। वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि इन विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने की बात आती है तो निर्णय आलाकमान से तय होगा। बघेल का यह संकेत स्वाभाविक भी हैं क्योकि पार्टी को इनकी जरूरत नहीं हैं। पूरे सियासी घटनाक्रम को जोड़ते हुए यदि मरवाही उपचुनाव को देखें तो सबसे बड़ा गड्ढा जोगी की पार्टी का हुआ है,क्योकि भाजपा को समर्थन देने के बाद अब पार्टी में दो फाड़ हो गया है,और सबसे ज्यादा फायदे में कांग्रेस दिख रही है। फिर भी चुनाव परिणाम आने तक इंतजार करना होगा। 

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