अंतरराष्ट्रीय

चीन सामरिक प्रतिस्पर्धा बिल को जोरदार समर्थन, भारत से सुरक्षा रिश्ते बढ़ाने व कूटनीतिक मदद का जिक्र

वाशिंगटन
सीनेट की एक शक्तिशाली समिति ने अहम चीन सामरिक प्रतिस्पर्धा विधेयक को जोरदार समर्थन करते हुए उसे मंजूरी दी है। इसमें न सिर्फ भारत के साथ सुरक्षा रिश्तों को बढ़ाने का समर्थन किया गया है बल्कि क्वाड समूह को समर्थन देने के अलावा अन्य बातों पर भी ध्यान दिया गया है। विधेयक में भारत को चीन के खिलाफ कूटनीतिक मदद का भी जिक्र किया गया है।

सीनेट की विदेश संबंध समिति ने तीन घंटे की चर्चा और कई संशोधनों के साथ सामरिक प्रतिस्पर्धा अधिनियम को 21 मतों के साथ अपनी मंजूरी दी। इस द्विपक्षीय विधेयक में कहा गया है कि अमेरिका निश्चित ही भारत के साथ व्यापक वैश्विक सामरिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

विधेयक में भारत-अमेरिकी द्विपक्षीय रक्षा विमर्शों एवं सहयोग को पहले से ज्यादा मजबूत करने को लेकर प्रतिबद्धता जताई गई है। विधेयक में अमेरिकी सरकार से अपील की गई है कि बाइडन प्रशासन भारत के साथ करीब से विचार-विमर्श कर ऐसे क्षेत्रों की पहचान करे जहां वह क्षेत्र में चीन के कारण उत्पन्न आर्थिक एवं सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की भारतीय कोशिशों में कूटनीतिक एवं अन्य सहायता दे सके।

चतुर्पक्षीय सुरक्षा संवाद के तौर पर पहचाने जाने वाले क्वाड समूह में अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल है। विधेयक में इसकी मजबूती के लिए उपाय बढ़ाने की सिफारिश की गई। वर्ष 2007 में इसकी स्थापना के बाद से चार सदस्य देशों के प्रतिनिधि समय-समय पर मिल रहे हैं। चार देशों के शीर्ष नेताओं ने पिछले महीने राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा आयोजित ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था।

ऑस्ट्रेलिया द्वारा चीन के साथ विवादास्पद बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) समझौते को रद्द करने के बाद बीजिंग ने बौखलाहट जताई कि यह अनुचित और भड़काऊ कार्रवाई है। चीन ने चेतावनी दी है कि इससे द्विपक्षीय रिश्तों को नुकसान पहुंचेगा। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मॉरिस पायने ने चीन के साथ चार समझौतों को रद्द करते हुए कहा कि विक्टोरिया प्रांत द्वारा 2018 व 2019 में किए ये समझौते उसके राष्ट्रीय हित के खिलाफ हैं।

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया की संघीय सरकार को दिसंबर में यह वीटो शक्ति दी गई थी कि वह किसी भी प्रांत के फैसले को रद्द कर सकती है। माना जा रहा है कि इस नए फैसले से ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है।

चीन के शिनजियांग प्रांत में तीन साल तक पाबंदी के बाद इस बार उइगर मुस्लिमों को रोजा रखने की अनुमति दी गई लेकिन मुसलमानों ने फिर भी रोजे नहीं रखे। इसका कारण उइगरों में चीनी अधिकारियों के प्रति वह खौफ है कि वे उनकी पहचान कट्टरपंथी मुस्लिमों के रूप में कर लेंगे और उसके बाद उनका उत्पीड़न और बढ़ जाएगा।

रेडियो फ्री एशिया पर शोहरत होशूर ने एक लेख में लिखा कि पिछले तीन साल से यहां रमजान पर रोजा रखने पर लगी रोक के दौरान मस्जिदों तक पर चीन सरकार का सख्त नियंत्रण रहता था। रोजे खोलने के समय रोजेदारों को पुलिस किसी भी कारण से बुला लेती ताकि वे रोजा न खोल सकें।

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