अंतरराष्ट्रीय

क्‍या इस्‍लामिक आतंकवाद को और भड़का रहा है फ्रांस?

नई दिल्‍ली
फ्रांस एक बार फिर आतंकवाद का शिकार हुआ है। पहले पेरिस के पास इतिहास के एक शिक्षक की पैगंबर मोहम्‍मद का कार्टून दिखाने पर हत्‍या कर दी गई। फिर नीस में चर्च जाने वाले तीन लोगों पर चाकू से हमला कर जान ले ली गई। पुलिस के अनुसार, दोनों ही घटनाओं में आरोपी ने 'अल्‍लाहू अकबर' के नारे लगाए थे। घटनाएं सामने आने के बाद, फ्रांस के गृह मंत्री ने 'ऑनलाइन नफरत फैलाने वालों' के खिलाफ अभियान छेड़ दिया। देशभर में सेना तैनात कर दी गई है। सरकार ने कई मुस्लिम संगठनों के खिलाफ ऐक्‍शन लिया है। कट्टरपंथ को लेकर फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति के ताजा बयान के खिलाफ दुनियाभर के मुसलमान प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञ यह भी आशंका जता रहे हैं कि फ्रांस कहीं इस्‍लामिक आतंकवाद को रोकने की कोशिश में उसे और न भड़का बैठे।

इस्‍लामिक संस्‍थाओं के खिलाफ ऐक्‍शन ले रही सरकार
फ्रेंच सरकार ने बराकासिटी नाम के एक एनजीओ को बंद करा दिया। सरकार के मुताबिक, इस संगठन को 'आतंकवादी घटनाओं को सही ठहराने में मजा आता है।' वहीं Le Collectif contre l’islamophobie en France नाम की एक संस्‍था को बैन करने की धमकी दी गई है। सरकार के अनुसार यह संगठन देश के खिलाफ काम करता है। सुरक्षा और आतंकवाद रोधी उपायों के अलावा मैक्रों की सरकार ने साफ कहा है कि अभिव्‍यक्ति के अधिकार को बिल्‍कुल भी कमजोर नहीं किया जाएगा। धर्मनिरपेक्षता के फ्रांसीसी रूप को भी सभी जगह बरकरार रखने का संकल्‍प लिया गया है।

मैक्रों के 'अलगाववाद' की परिभाषा में दिक्‍कत?
कट्टर इस्‍लाम को लेकर फ्रांसीसी सरकार की सोच थोड़ी अलग है। उसका मानना है कि फ्रांस में आतंकवाद की मुख्‍य वजह फ्रांसीसी मुसलमानों का देश की धर्मनिरपेक्ष संस्‍कृति को ठीक से आत्‍मसात न करना है। इसी साल अक्‍टूबर में ताजा घटनाओं के बाद, मैक्रों ने एक नया कानून लाने की बात कही थी जिसके जरिए 'अलगाववाद' से लड़ा जाएगा। हालांकि न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स में विंसेंट गीजर लिखते हैं कि मैक्रों का 'अलगाववाद' यह मानता है कि बड़ी संख्‍या में मुसलमान खुद को फ्रांस के बाकी समाज से अलग देखते हैं। विंसेंट ने कई शोधों के आधार पर कहा है कि फ्रांस के मुसलमान सामाजिक और सांस्‍कृतिक रूप से खासे घुले-मिले हैं।

'बाकी लोगों से अलग पहचान बताना सही नहीं'
फ्रांस का राजनीतिक माहौल इस्‍लामिक कट्टरपंथ की खुलकर आलोचना न करने के लिए मुसलमानों को डपटता है। विंसेंट अपनी रिसर्च के आधार पर कहते हैं कि फ्रांस के मुस्लिम संगठनों ने आतंकवादी घटनाओं की निंदा की है। विंसेंट लिखते हैं कि अगर अलगाववाद के कथित खतरे को लेकर चेतावनी देने से फ्रांस के मुस्लिम अलगाववाद के खिलाफ नहीं खड़े होंगे, बल्कि इसका उलटा होगा। उन्‍होंने कहा कि फ्रांसीसी सरकार के कड़े तेवर कुछ मुसलमानों के मन में यह बात डाल सकते हैं कि वे सच में फ्रेंच लोगों से अलग हैं। विंसेंट के मुताबिक, फ्रांस की सरकार जिस डर को दूर करने की कोशिश कर रही है, कहीं उसे भड़काने के जिम्‍मेदार वहीं न हों। विरोध के बाद मैक्रों यह सफाई देने की कोशिश कर रहे हैं कि फ्रांस के मकसद को गलत समझा जा रहा है।

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