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कोरोना के सुपर वेरिएंट से और मचेगी तबाही, टेंशन में वैज्ञानिक

नैरोबी/नई दिल्ली
भारत में कोरोना से हालात बुरी तरह से बेकाबू हैं और हर दिन भारत में 4 हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। लेकिन, भारत की खराब स्थिति का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। खासकर अफ्रीकी देशों का स्वास्थ्य भारत में खराब हालत की वजह से और बिगड़ रहा है। भारत ने वैक्सीन के निर्यात पर रोक क्या लगाई, अफ्रीकी देशों में हाहाकार मच गया है। अफ्रीकी देशों की हालत को देखते हुए केन्या के टॉप साइंटिस्ट ने पूरी दुनिया के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अफ्रीकी देशों में वैक्सीनेशन की रफ्तार ना के बराबर है, जिससे महामारी और तेजी से फैलेगी, इसके साथ ही कोरोना के कई और सुपर वेरिएंट्स पैदा होंगे, जो तबाही फैलाने के लिए काफी होंगे।
 
गरीबी और भयानक आर्थिक संकट से जूझते अफ्रीकी देशों के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वो अपने देशवासियों के लिए वैक्सीन खरीद सके और देश में बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन अभियान चला सके। लिहाजा केन्या जैसे देश पूरी तरह से डब्ल्यूएचओ के कोवैक्स स्कीम पर ही निर्भर हैं। कोवैक्स एक ग्लोबल गठबंधन है, जो बिना किसी भेदभाव के सभी देशों को समान तरीके से वैक्सीन उपलब्ध करवाता है। जबतक भारत में कोरोना का दूसरा लहर नहीं फैला था, तब तक भारत सरकार ने कोवैक्स स्कीम में काफी ज्यादा वैक्सीन की खुराक भेजी, लेकिन इस वक्त भारत ने किसी और देश को वैक्सीन देने पर रोक लगा रखी है। कोवैक्स की वजह से ही अफ्रीकी देशों तक वैक्सीन के लाखों डोज पहुंचाए गये हैं। भारत में बनने वाली एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड वैक्सीन की बड़े पैमाने पर अफ्रीकी देशों में सप्लाई की है। इस वैक्सीन को भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने तैयार किया है। केन्या को अब तक कोवैक्स स्कीम के तहत वैक्सीन की जितनी भी खुराक मिली है, वो सारी खुराक का इस्तेमाल कर चुका है और अब आलम ये है कि केन्या में वैक्सीनेशन रूकने वाली है।

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