राष्ट्रीय

कोरोना का इलाज ढूंढ रही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी मंदिर की शरण में पहुंचा

 नई दिल्ली 
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने कोरोना के इलाज से जुड़े एक ट्रायल (प्रिंसिपल ट्रायल) के लिए लंदन स्थित स्वामी नारायण संस्था से सहयोग मांगा है। ब्रिटेन के अलग-अलग समुदायों और नस्ल के लोगों के बीच यह ट्रायल कर रहे विशेषज्ञ चाहते हैं कि संस्था भारतीय मूल के लोगों को इससे जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करे। इस ट्रायल के जरिए विशेषज्ञ इलाज के उन तरीकों के बारे में पता करना चाहते हैं, जिनसे 50 से अधिक उम्र के कोरोना पीड़ितों को शुरुआती दौर में ही ठीक किया जा सके और उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता न पड़े। 

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रायल के लिए वॉलंटियर की भर्ती बड़ी चुनौती है। क्योंकि अश्वेत, एशियाई और अल्पसंख्यक समुदायों के लोग इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने से कतरा रहे हैं। ऐसे में स्वामीनारायण संस्था के प्रमुख साधु योगी विवेकदास ऑनलाइन प्रवचनों में अपने ब्रिटिश अनुयायियों को इस ट्रायल के बारे में विस्तार से समझा रहे हैं। वह उन्हें बताते हैं कि जिन लोगों में कोरोना के लक्षण भी हैं। वे घर बैठे ऑनलाइन ही इस ट्रायल से जुड़ सकते हैं।

ट्रायल के सह प्रमुख प्रोफेसर क्रिस बटलर का कहना है कि स्वास्थ्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण ट्रायल को स्वामीनारायण संस्था का पूरा समर्थन मिल रहा है। संस्था समुदायों, परिवारों और व्यक्तियों के बीच इसे बढ़ावा दे रही है। अलग-अलग समुदायों के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने में संस्था का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है। बटलर के मुताबिक, अभी 1300 प्रतिभागियों को इस ट्रायल से जोड़ा गया है। उम्मीद है कि संस्था की सहायता से और ज्यादा लोग परीक्षण में शामिल होंगे, जिससे 50 से ज्यादा उम्र के कोरोना पीड़ितों के लिए एक बेहतर इलाज ढूंढ़ने में मदद मिलेगी। उनका मानना है कि यह एशियाई और अश्वेत समुदायों को कोरोना संक्रमण से बचाने में भी मददगार होगा क्योंकि यह वायरस अब तक सबसे ज्यादा इन्हीं समुदायों के लिए घातक साबित हुआ है।

पूरे यूरोप में हिन्दुओं की आस्था का केंद्र 
लंदन स्थित बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्थान एक प्रमुख हिन्दू आस्था का केंद्र है। ब्रिटेन ही नहीं पूरे यूरोप में इस संस्थान के अनुयायी मौजूद हैं। इस मंदिर को नेस्डेन मंदिर नाम से भी जाना जाता है। अन्य देशों में भी इस संस्थान के मंदिर स्थापित हैं। 

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