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कैसे हुई ‘जासूसी जहाज’ की एंट्री आसान, पूर्व नौसेना प्रमुख ने विक्रमसिंघे सरकार बनाया था दबाव

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नई दिल्ली
भारत और अमेरिकी की चिंता और तमाम विरोध के बावजूद श्रीलंकाई सरकार ने चीन के 'जासूसी जहाज' युआन वांग 5 को हम्बनटोटा बंदरगाह में एंट्री की अनुमति दी। यह जहाब 21 अगस्त तक बंदरगाह में ही रहेगा। अत्याधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम से लैस इस जहाज में बैलिस्टक मिसाइल को ट्रैकिंग करने की क्षमता है। इसके अलावा हिन्द महासागर में अपने सबमरीन ऑपरेशन को अंजाम देने से पूर्व शोध करने की क्षमता है। इस जहाज की एंट्री को लेकर दावा किया जा रहा था कि संभवतः चीन की शी जिपिंग सरकार ने श्रीलंका पर दबाव बनाया होगा लेकिन, फैक्ट यह है कि श्रीलंका के पूर्व सुरक्षा मंत्री और पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल ने विक्रमसिंघे सरकार पर दबाव बनाया था।

चीन के जहाज युआन वांग 5 को श्रीलंका सरकार ने आज सुबह 4.00 बजे हम्बनटोटा बंदरगाह में घुसने और शोध की अनुमति दी। यह जहाज 21 अगस्त तक इसी बंदरगाह में रहेगा। श्रींलकाई सरकार ने जहाज को एंट्री देते वक्त सफाई दी थी कि बीजिंग को बंदरगाह 99 साल के लिए लीज पर दिया है। इसलिए जहाज को एंट्री देने की अनुमति न देने के पीछे कोई कारण नहीं था।

पहले जानकारी सामने आ रही थी कि 11-17 अगस्त के बीच हम्बनटोटा बंदरगाह पर जहाज की एंट्री को स्थगित किया गया लेकिन, रानिल विक्रमसिंघे सरकार शी जिनपिंग शासन के दबाव में खड़ी नहीं हो सकी। संभवतः बीजिंग की धमकी के बाद श्रीलंकाई सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। इसके पीछे कारण सामने आ रहा था हो सकता है कि चीन आईएमएफ ऋण को अवरुद्ध करने की कोशिश कर रहा था। ऐसे में क्योंकि कोलंबो आधिकारिक रूप से दिवालिया घोषित हो चुका है, श्रीलंका को आर्थिक मजबूती के लिए यह कदम उठाना पड़ा। जबकि, तथ्य यह है कि जब विक्रमसिंघे सरकार ने जासूसी जहाज की एंट्री को टाल दिया, तो उनकी सरकार किसी और के दबाव में नहीं आई, बल्कि पूर्व सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री और पूर्व नौसेना प्रमुख रियर एडमिरल सरथ वीरशेखर ने विक्रमसिंघे सरकार के कदम का खुले तौर पर विरोध किया।

श्रीलंका में चीन का दबदबा
श्रीलंका के भीतर चीनी दबदबा ऐसा है कि 8 अगस्त को अब सांसद ने राष्ट्रपति, पीएम और बीजिंग के करीबी दोस्त महिंदा राजपक्षे के सामने भारतीय चिंताओं के बावजूद जहाज को एंट्री की अनुमति देने के पक्ष में पैरवी की। श्रीलंका में स्थित राजनयिकों के अनुसार, हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में पिछले एक दशक में अनुसंधान जहाजों की आड़ में चीनी जासूसी जहाजों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। यह समझा जाता है कि 2020 से हिंद महासागर क्षेत्र में 53 तथाकथित चीनी जहाजों की एंट्री की जा चुकी है।

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