छत्तीसगढ़राज्य

केन्द्र के नये कृषि कानून के विरोध में सड़कों पर उतरे किसानों ने किया चक्काजाम-प्रदर्शन

रायपुर
छत्तीसगढ़ समेत देशभर के लाखों किसान-मजदूर कृषि कानून के खिलाफ आज सडक पर उतर गए हैं, और अलग-अलग राष्ट्रीय राजमार्गों पर एकजुट होकर देशव्यापी चक्काजाम-प्रदर्शन कर रहे हैं। राजधानी रायपुर के सेरीखेड़ी में सैकड़ों किसान इक_ा होकर एनएच-6 पर चक्काजाम-प्रदर्शन किया।  बड़ी संख्या में बिलासपुर, कोरबा महासमुंद, दुर्ग-नांदगांव, धमतरी से लेकर बस्तर तक से आए किसान-मजदूर इस आंदोलन व प्रदर्शन  में शामिल हुए।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आव्हान पर छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा व अन्य राज्यों में लाखों किसान-मजदूर कृषि कानून के विरोध में यहां की राष्ट्रीय राजमार्गों का चक्काजाम आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेश में छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के घटक संगठनों के साथ 30 से ज्यादा किसान-मजदूर संगठन सडक पर उतर गए हैं। ये सभी केन्द्रीय कृषि कानून का बैनर-पोस्टर के साथ नारेबाजी करते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, और कई जगहों पर जाम की स्थिति बनी हुई है। दूसरी तरफ, वे सभी छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी हर साल की तरह इस साल भी 10 नवम्बर से करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नए कृषि कानून और धान खरीदी देरी से किसान परेशान हैं।

छत्तीसगढ़ किसान सभा अध्यक्ष संजय पराते, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन राज्य संयोजक आलोक शुक्ला व अन्य किसान नेताओं का कहना है कि कॉपोर्रेट गुलामी की ओर धकेलने वाले कृषि कानूनों के खिलाफ देश के किसान तब तक संघर्ष करेंगे, जब तक इन्हें बदला नहीं जाता। यह संघर्ष छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार की उन नीतियों के खिलाफ भी है, जिसने किसानों के हितों की रक्षा करने के वादे के बावजूद मंडी संशोधन अधिनियम में न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का प्रावधान नहीं किया है और डीम्ड मंडियों के प्रावधान के जरिये केंद्र सरकार द्वारा मंडियों के निजीकरण के कॉपोर्रेटपरस्त फैसले का अनुमोदन कर दिया है। यही कारण है कि इस मौसम में मंडियों में भी किसान धान के समर्थन मूल्य से वंचित हो रहे हैं। इसके बावजूद सरकार सोसाइटियों में खरीदी के लिए तैयार नहीं है।

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