उत्तर प्रदेशराज्य

‘किलिंग मशीन’ विकास दुबे के ‘बर्बाद’ खजांची जय बाजपेई की कहानी

कहा जाता है कि बुरे काम का बुरा नतीजा। कानपुर के बिकरू हत्याकांड के बाद 'किलिंग मशीन' विकास दुबे का भी अंत हो गया। हां, विकास दुबे के साथ पुलिस महकमे की कई कहानियां जरूर जिंदा हो गईं। दुर्दांत विकास दुबे के ढेरों किस्सों में उसका मैनेजर जय बाजपेई भी काफी अहम किरदार है। एक ऐसा किरदार जो फर्श से अर्श तक पहुंचा लेकिन चुटकियों में बर्बाद भी हो गया। आइए तस्वीरों में देखते हैं जय बाजपेई की जिंदगी की पूरी कहानी।

खजांची नंबर-1 नाम से चर्चित हुआ जय
बिकरू हत्याकांड के 36 आरोपी जेल में है और विकास दुबे समेत 6 बदमाश एनकाउंटर में मारे जा चुके है। बिकरू कांड के बाद सबसे ज्यादा सुर्खियां विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई ने बटोरी हैं। जय बाजपेई की फर्श से अर्श और फिर अर्श से फर्श पर पहुंचने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। बिकरू कांड के बाद जय बाजपेई को लोग विकास दुबे के 'खजांची नंबर-1' के नाम से जानने लगे। जय बाजपेई का नाम बिकरू कांड में आने से उसके करीबियों की भी मुश्किलें बढ़ गईं।

…और पुलिस के रेडार पर आया 'खजांची'
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने बीते 2 जुलाई की रात अपने गुर्गो के साथ मिलकर पुलिस टीम पर घात लगाकर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस दौरान सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे और 6 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। बीते 5 जुलाई की सुबह विजय नगर चौराहे से जय बाजपेई की तीन लग्जरी कारें लावारिस हालत में पाई गई थीं। इन कारों का इस्तेमाल विकास दुबे और उसके गुर्गों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए होने वाला था। पुलिस की सक्रियता के कारण ये गाड़ियां पकड़ ली गई थीं। यहीं से जय बाजपेई पुलिस की रेडार पर आ गया था।

अपराध के जरिए बन गया धन्नासेठ
विकास दुबे का खजांची जय बाजपेई 10 साल पहले नजीराबाद थाना क्षेत्र में एक छोटे से मकान में रहता था और जयकांत बाजपेई के प्रिंटिंग कारखाने में काम करता था। कहा जाता है कि इसी बीच जय हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के सपंर्क में आ गया। दरअसल, विकास दुबे का गांव और जय का गांव आसपास है। जय बाजपेई हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की ब्लैकमनी को वाइट करने का काम करता था। इस काम में उसके तीनों भाई उसका साथ देते थे। जय बाजपेई विकास दुबे का पैसा रियल स्टेट, जमीनों की खरीद फरोख्त, सरकारी जमीनों पर कब्जा करने का काम करता था। जय और उसके भाइयों ने अपराध के जरिए अकूत संपत्ति अर्जित की थी।

हाई प्रोफाइल लोगों से नाता
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का अपराधों में साथ देकर जय बाजपेई ने करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की थी। कानपुर में आठ मकान, फ्लैट, 6 लग्जरी गाड़ियां। यही नहीं, जिस मकान में जय बाजपेई रहता था वह हर तरह की सुख सुविधा से लैस था। विकास दुबे का करोड़ों रुपया जय बाजपेई ने ब्याज में बांट रखा था। उसकी लग्जरी लाइफ स्टाइल देखकर पुलिस महकमे के आलाधिकारी से लेकर थाने के पुलिसकर्मी उसकी आवभगत में लगे रहते थे। उसके एक मकान में सिर्फ पुलिसकर्मी रहते थे, जिन्हे बिकरू कांड के बाद निलंबित किया गया था।

ब्याज में उठा रखा था करोड़ों रुपये
बिकरू हत्याकांड के बाद से विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी। बीते 5 सिंतबर को विजय नगर चौराहे से जय बाजपेई की तीन लग्जरी कारें पकड़ी गई थीं। पुलिस की जांच में यह बात निकल कर सामने थी कि तीन कारों का इस्तेमाल विकास दुबे और गुर्गो को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए होने वाला था। जब पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि जय बाजपेई हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की ब्लैकमनी को व्हाईट करने का काम करता था। विकास का पैसा रियल स्टेट, जमीन की खरीद फरोख्त में करता था। इसके साथ जय बाजपेई ने विकास दुबे का करोड़ो रुपया ब्याज में बांट रखा था।

विकास को दिए कारतूस, रिवॉल्वर और…
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने अपने खजांची जय बाजपेई को बीते 01 जुलाई को फोन कर गांव आने के लिए कहा था। जय बाजपेई अपने साथी प्रशांत शुक्ला के साथ बीते 2 जुलाई की दोपहर बिकरू गांव पहुंचा था। जय बाजपेई ने विकास दुबे को 25 लाइसेंसी कारतूस, रिवॉल्वर और दो लाख रुपए दिए थे। बीते 20 जुलाई को नजीराबाद पुलिस ने प्रशांत शुक्ला और जय बाजपेयी को गिरफ्तार कर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा था। जय बाजपेई समेत उसके तीनों भाइयों पर 31 जुलाई को नजीराबाद थाने में गैंगस्टर ऐक्ट की कार्रवाई की गई थी।

यूं तीनों भाइयों ने किया था सरेंडर
जय के तीनों भाई अजयकांत, रजयकांत और शोभित बिकरू कांड के बाद से फरार चल रहे थे। पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिशें दे रही थी। गैंगस्टर की कार्रवाई होने के बाद पुलिस ने तीनों भाइयों पर 25 हजार का इनाम रखा था। पुलिस ने बीते 01 सितंबर को तीनों भाइयों के घर के बाहर मुनादी पिटवाकर 82 की कार्रवाई का नोटिस चस्पा किया था। बीते 4 सितंबर को अजयकांत, रजयकांत और शोभित ने कानपुर की गैंगस्टर कोर्ट में अधिवक्ताओं की पोशाक में कोर्ट में सरेंडर किया था।

…और अर्श से फर्श पर पहुंच गया जय बाजपेई
कानपुर पुलिस ने जय बाजपेई और उसके भाइयों द्वारा अर्जित की गई संपत्ति को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें जब्तीकरण को लेकर भी विवरण दिया गया था और यह कहा गया था कि जय और उसके भाइयों ने अपराध के जरिए संपत्ति अर्जित की गई है। पुलिस ने रिपोर्ट बनाकर डीएम आलोक तिवारी को सौंपी थी। इस रिपोर्ट पर डीएम ने संपत्ति जब्त करने का आदेश दे दिए थे। इन संपत्तियों में 8 भवन व भूखंड, 5 बाइकें, एक स्कूटी और 6 लग्जरी कारें शामिल थीं। जिला प्रशासन ने जय बाजपेई की संपत्ति को जब्त कर लिया था।

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