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एंजेल ब्रोकिंग को म्यूचुअल फंड्स यूपीआई ऑटोपे के लिए मंजूरी

 मुंबई
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने ब्रोकरेज हाउस एंजेल ब्रोकिंग (Angel Broking) को म्यूचुअल फंड्स यूपीआई ऑटोपे (UPI Autopay) के लिए मंजूरी दे दी है। यह देश का पहला ब्रोकरेज हाउस है, जिसे एनपीसीआई ने म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए अनुमति दी है। अपनी तरह की इस पहली सुविधा ने ई-मैनडेट ऑथेंटिकेशन (E Mandate Authentication) के समय को घटाकर एक मिनट से भी कम कर दिया है। इसके साथ ही इसकी प्रक्रिया को भी सरल बना दिया है। इसके साथ ही इसने ई-मैनडेट ऑथेंटिकेशन की लागत भी खत्म कर दी है।

क्या होगा फायदा
यह डेवलपमेंट म्यूचुअल फंड इकोसिस्टम में मजबूत वैल्यू ऐड करेगा, क्योंकि यूपीआई के पास ग्राहकों का एक बड़ा बेस है। इससे यूपीआई ऑटोपे एसआईपी (SIP) ग्राहकों के लिए पेमेंट का एक आसान विकल्प मिल जाएगा। यह आगे एनएसीएच मैनडेट (NACH Mandate) के रजिस्ट्रेशन और कॉलिंग को टच-ऑफ-द-बटन अनुभव के साथ सहज बनाएगा। इससे सिप के लिए ई-मैनडेट ऑथेंटिकेशन में लगने वाला समय भी घट कर महज कुछ सेकेंड रह जाएगा।

निवेशक एक्टिव कर सकेंगे रिकरिंग ई मैनडेट
एनपीसीआई (National Payment Corporation of India) ने यूपीआई ऑटोपे रिकरिंग पेमेंट्स (recurring payments) के लिए शुरू किया है। इसे यूपीआई 2.0 (UPI 2-0) प्लेटफार्म के तहत विकसित किया गया है। इस नई सुविधा के साथ ग्राहक अब रिकरिंग पेमेंट के लिए किसी भी यूपीआई ऐप (Any UPI app) का उपयोग कर रिकरिंग ई-मैनडेट (Recurring E Mandate) को एक्टिव कर सकेंगे।

कैसे होगा ई मैनडेट
इसके लिए किसी भी यूपीआई-इनेबल्ड एप्लिकेशन में एक 'मैंडेट' सेक्शन भी होगा। इसी के माध्यम से ग्राहक ऑटो डेबिट मैनडेट क्रिएट कर सकते हैं, अप्रूव कर सकते हैं, संशोधित कर सकते हैं, रोक सकते हैं। मैंडेट सेग्मेंट ग्राहकों को उनके रेफरेंस और रिकॉर्ड के लिए अपने पिछले मैंडेट को देखने की अनुमति देगा। रिकरिंग पेमेंट पर ग्राहकों के खर्च को ध्यान में रखते हुए ऑटो डेबिट मैनडेट auto debit mandate का पैटर्न बनाया गया है। मैनडेट वन-टाइम, डेली, वीकली, फोर्टनाइटली, मासिक, द्वि-मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक रूप से निर्धारित किए जा सकते हैं।

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