राष्ट्रीय

उमर-महबूबा बोले- केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को बेचने का रास्ता खोला

श्रीनगर
केंद्र सरकार ने भूमि कानूनों में संशोधन कर बाहरी लोगों के लिए जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने का रास्ता खोल दिया है। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। हालांकि केंद्र के इस कदम का घाटी में विरोध भी होने लगा है। जम्मू-कश्मीर के प्रमुख राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार के इस कदम का विरोध किया है और राज्य के लोगों के साथ विश्वासघात करार दिया है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के सात राजनीतिक दलों के गठबंधन गुपकर घोषणा पीपुल्स अलायंस ने भूमि कानूनों में बदलावों को लेकर केंद्र पर निशाना साधा है। अलायंस ने इसके खिलाफ लड़ाई लड़ने की भी घोषणा की है।

उमर बोले, 'जम्मू-कश्मीर को बिक्री के लिए रखा'
नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर में भूमि के मालिकाना हक को लेकर कानूनों में किए गए संशोधन हमें नामंजूर हैं। गैर-कृषि भूमि की खरीद और कृषि भूमि के ट्रांसफर को आसान बनाकर निवास की प्रतीकात्मक जरूरत को भी समाप्त कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर को बिक्री के लिए रख दिया गया है। कम जमीन रखने वाले गरीब जमीन मालिकों को नुकसान उठाना पड़ेगा।'

'जम्मू-कश्मीर के लोगों को कहीं का न छोड़ने की कोशिश'
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों को कहीं का न छोड़ने के लिए उठाया गया कदम है। उन्होंने ट्वीट किया, 'यह जम्मू-कश्मीर के लोगों को कमजोर करने और उन्हें कहीं का न छोड़ने के भारत सरकार के नापाक मंसूबों से जुड़ा एक और कदम है। असंवैधानिक तरीके से अनुच्छेद 370 हटाकर हमारे प्राकृतिक संसाधनों की लूट की इजाजत दी गई और अब जम्मू-कश्मीर की जमीन बिक्री के लिए रख दी।'

राज्य के स्थायी निवासी होने की शर्त हटाई
केंद्र सरकार के नए संशोधनों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में घर, दुकान बनाने के लिए कृषि भूमि के इस्तेमाल की मंजूरी दी जा सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव जम्मू-कश्मीर विकास अधिनियम में किया गया है, जिसकी धारा 17 से 'राज्य के स्थायी निवासी' होने की शर्त को हटा दिया है।

अनुच्छेद 370 और 35ए हटने से खुला जमीन खरीदने का रास्ता
बता दें कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-ए के निरस्त होने से पहले तक जम्मू-कश्मीर में कोई भी दूसरे राज्य का व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता था। हालांकि, अब केंद्र सरकार के ताजा बदलावों के बाद जम्मू-कश्मीर से बाहर के लोगों के लिए केंद्र शासित प्रदेश में जमीन खरीदने का रास्ता खुल गया है।

स्कूल-कॉलेज या हॉस्पिटल के लिए कृषि योग्य जमीन भी दी जा सकेगी
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि इन संशोधनों में कृषि भूमि देने की अनुमति नहीं दी गई है। हालांकि, कानून में कई छूट दी गई हैं जिसके तहत शैक्षणिक या स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की स्थापना सहित गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए कृषि भूमि दी जा सकती है। पूर्व महाधिवक्ता मोहम्मद इसहाक कादरी ने कहा कि इन संशोधनों ने जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोगों के लिए यहां भूमि खरीदने के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। उन्होंने कहा, ‘अब बाहरी लोगों के यहां जमीन खरीदने पर कोई कानूनी रोक नहीं है।'

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