राष्ट्रीय

अर्णब का नाम लिए बगैर राहुल गांधी ने पूछा- क्या अधिकार सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए

ललितपुर
उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर हमले का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ललितपुर जिले के जाखलौन थाना क्षेत्र के धोर्रा गांव में सड़क निर्माण के कार्यों की खबरों को कवर करते वक्त ग्राम प्रधान के बेटों ने एक पत्रकार पर हमला किया था। इस मामले को लेकर कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने नाम लिए बगैर कहा है कि यूपी के पत्रकार विनय तिवारी को बीजेपी के गुंडों ने बेरहमी से पीटा है। अधिकारों की बात चली है तो सोचा पूछ लें कि कुछ चुनिंदा पत्रकारों के लिए ही अधिकार याद आएंगे या विनय तिवारी जैसे पीड़ितों के लिए भी।

पुलिस ने आरोपियों पर की कार्रवाई
पत्रकार पर जानलेवा हत्या के मामले में पुलिस ने ग्राम प्रधान समेत पांच आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। जाखलौन थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) जयप्रकाश चौबे ने बताया, 'धोर्रा गांव में पत्रकार विनय तिवारी (35) के ऊपर जानलेवा हमले की यह घटना शनिवार की है। पत्रकार तिवारी भी धोर्रा गांव के ही रहने वाले हैं। उस गांव में अभिषेक मिश्रा की मां ग्राम प्रधान हैं और प्रधानी का पूरा काम अभिषेक ही करते हैं।'

महबूबा मुफ्ती ने कहा…
वहीं, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को कहा कि वह स्वतंत्रता के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की 'नाराजगी' से सहमत हैं, लेकिन जब बात कश्मीरियों की होती है तो यह चयनात्मक हो जाती है। मुफ्ती का बयान रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की ओर से की गई टिप्पणी के संदर्भ में आया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर कहा, 'स्वतंत्रता के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी से सहमत हूं। लेकिन दुख की बात है कि यह नाराजगी चयनात्मक है क्योंकि बेबुनियाद इल्जामों पर सैकड़ों कश्मीरियों और पत्रकारों को जेलों में बंद कर रखा गया है। इन मामलों में अदालत का फैसला भूल जाइए, उनकी तो सुनवाई तक नहीं होती है। उनकी स्वतंत्रता के लिए तत्कालिकता क्यों नहीं है?'

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button